बाँकी बिलोकनि रंग भरी

Raskhan

बाँकी बिलोकनि रंग भरी रसखानि खरी मुसकानि सुहाई ।
बोलत बैन अमीनिधि चैन महारस ऐन सुने सुखदाई ॥
सजनी बन में पुर बीथिन* में पिय गोहन लागो फिरै मोरि माई ।
बाँसुरी टेर सुनाइ अली अपनाइ लई ब्रजराज कन्हाई ॥२६॥