बैरिन तो बरजी न
बैरिन तो बरजी न रहै अबहीं घर बाहर बैर बढ़ेगो ।
टोना सो नंद ढुटौना पढ़े सजनी तोहि देखि विशेष बढ़ेगो ॥
सुनिहै सखि गोकुल गाँव सबै रसखानि तबै इह लोक रढ़ेगो ।
बैस चढ़े घरही रहि बैठि अटानि चढ़े बदनाम चढ़ेगो ॥७२॥
बैरिन तो बरजी न रहै अबहीं घर बाहर बैर बढ़ेगो ।
टोना सो नंद ढुटौना पढ़े सजनी तोहि देखि विशेष बढ़ेगो ॥
सुनिहै सखि गोकुल गाँव सबै रसखानि तबै इह लोक रढ़ेगो ।
बैस चढ़े घरही रहि बैठि अटानि चढ़े बदनाम चढ़ेगो ॥७२॥