ब्याही अनब्याही ब्रजमाही सब
ब्याही अनब्याही ब्रजमाही सब चाही तासों
दूनी सकुचाई दीठि परै न जुन्हैया की ।
नेकु मुसकानि रसखानि की बिलोकत ही
चेरी होत एक बार कुंजन दिखैया की ।
मेरो कह्यो मानि अंत मेरो गुन मानि हैरी
प्रात खात जात ना सकांत सौंह भैया की ।
माइ की अँटक जौलौं सासु की हटक तौलौं
देखी ना लटक मेरे दूलह कन्हैया की ॥७५॥