ब्रह्मा मैं ढूँढ़्यो पुरानन
ब्रह्मा मैं ढूँढ़्यो पुरानन गानन वेद रिचा सुनि चौगुने चायन ।
देख्यो सुन्यो कबहूँ न कितूँ वह कैसे सरूप औ कैसे सुभायन ॥
टेरत हेरत हारि पर्यो रसखानि बतायो न लोग लुगायन ।
देखो दुरो वह कुंजकुटीर मैं बैठो पलोटत राधिका पायन ॥२७॥
ब्रह्मा मैं ढूँढ़्यो पुरानन गानन वेद रिचा सुनि चौगुने चायन ।
देख्यो सुन्यो कबहूँ न कितूँ वह कैसे सरूप औ कैसे सुभायन ॥
टेरत हेरत हारि पर्यो रसखानि बतायो न लोग लुगायन ।
देखो दुरो वह कुंजकुटीर मैं बैठो पलोटत राधिका पायन ॥२७॥