भई वावरी ढूँढ़ति वाहि

Raskhan

भई वावरी ढूँढ़ति वाहि तिया अरी लाल ही लाल भयौ कहा तेरो ।
ग्रीवा ते छूटि गयौ अबहीं रसखानि तज्यौ घर मारग हेरो ॥
डरियै कहै माय हमारी बुरी हिय नेकु न सूनो सहै छिन मेरो ।
काहे को खाइबो जाइवो है सजनी अनखाइबो* सीस सहेरो ॥२१०॥