भटू सुन्दर स्याम सिरोमनि

Raskhan

भटू सुन्दर स्याम सिरोमनि मोहन जोहन मैं चित चोरत है ।
अवलोकन बंक विलोचन मैं व्रजवालन के दृग जोरत है ।
रसखानि महावत रूप सलोने को मारग तैं मन मोरत है ।
गृह काज समाज सबै कुल लाज लला व्रजराज को तोरत है ॥१७४॥