भेती* जु पै कुवरी
भेती* जु पै कुवरी इह्याँ सखी भरी लातन मूका बकोटती लेती ।
लेती निकारि हिये की सबै नक्क छेदि कै कौड़ी पिराइ कै देती ।
देती नचाई कै नाच वा राँड़ कौं लाल रिझावन को* फल सेती ।
सेती सदाँ रसखानि लिये कुवरी के करेजनि सूलसी भेती ॥२३३॥
भेती* जु पै कुवरी इह्याँ सखी भरी लातन मूका बकोटती लेती ।
लेती निकारि हिये की सबै नक्क छेदि कै कौड़ी पिराइ कै देती ।
देती नचाई कै नाच वा राँड़ कौं लाल रिझावन को* फल सेती ।
सेती सदाँ रसखानि लिये कुवरी के करेजनि सूलसी भेती ॥२३३॥