मारग रोकि रह्यौ रसखानि
मारग रोकि रह्यौ रसखानि के कान परी झनकार नई है ।
लोग चितै चित दै चितए नख तैं मन माहि निहाल* भई है ॥
ठोढ़ी उठाइ चितै मुसकाइ मिलाइ कें नैन लगाइ लई है ।
जौं विछिया बजनी सजनी हम मोल लई पुनि वेचि दई है ॥१६८॥
मारग रोकि रह्यौ रसखानि के कान परी झनकार नई है ।
लोग चितै चित दै चितए नख तैं मन माहि निहाल* भई है ॥
ठोढ़ी उठाइ चितै मुसकाइ मिलाइ कें नैन लगाइ लई है ।
जौं विछिया बजनी सजनी हम मोल लई पुनि वेचि दई है ॥१६८॥