मैन मनोहर बैन बजै

Raskhan

मैन मनोहर बैन बजै सु सजै तन सोहत पीत पटा है ।
यों दमकै चमकै झमकै दुति दामिनी की मनो स्याम छटा है ॥
ए सजनी ब्रजराजकुमार अटा चढ़ि फेरत लाल वटा है ।
रसखानि महामधुरी मुख की मुसकानि करै कुलकानि कटा है ॥३८॥