मैन मनोहर री दुखदंदन
मैन मनोहर री दुखदंदन है सुखकंदन नंद को नंदा ।
बंक विलोकनि की अवलोकन है दुखमोचन* प्रेम की फंदा ।
जाकी लसै मुख रूप-अनूपम होत पराजय कोटिक चंदा ।
हौं रसखानि बिकाइ गई नहि मोल लई सजनी सुखकंदा ॥२५१॥
मैन मनोहर री दुखदंदन है सुखकंदन नंद को नंदा ।
बंक विलोकनि की अवलोकन है दुखमोचन* प्रेम की फंदा ।
जाकी लसै मुख रूप-अनूपम होत पराजय कोटिक चंदा ।
हौं रसखानि बिकाइ गई नहि मोल लई सजनी सुखकंदा ॥२५१॥