मोरपखा मुरली बनमाल लख्यो'
मोरपखा मुरली बनमाल लख्यो’ हिय मैं’ हियरा उमह्यौरी ।
ता दिन तें इन बैरिन कों कौन न बोल कुवोल सह्यौरी ॥
तौ रसखानि सनेह लग्यो कोउ एक कह्यो कोउ’ लाख कह्यौरी ।
और तो रंग रह्यौ न रह्यौ इक रंग’ रँगी सोई रंग रह्यौरी ॥८२॥
मोरपखा मुरली बनमाल लख्यो’ हिय मैं’ हियरा उमह्यौरी ।
ता दिन तें इन बैरिन कों कौन न बोल कुवोल सह्यौरी ॥
तौ रसखानि सनेह लग्यो कोउ एक कह्यो कोउ’ लाख कह्यौरी ।
और तो रंग रह्यौ न रह्यौ इक रंग’ रँगी सोई रंग रह्यौरी ॥८२॥