मोर किरीट नवीन लसै

Raskhan

मोर किरीट नवीन लसै मकराकृत कुण्डल लोल की डोरनि ।
ज्यों रसखान घने घन में दमकै विवि दामिनि चाप के छोरनि ।
मारि है जीव तो जीव बलाय विलोकि बलाय लौं नैन की कोरनि ।
कौन सुभाय सों आवत स्याम बजावत वैनु नचावत मोरनि ॥१६७॥