मोहन को मुरली सुनिकै
मोहन को मुरली सुनिकै वह बौरी ह्वै आनि अटा चढ़ि झाँकी ।
गोप बड़ेन की डोठि बचाइ कै दीठि* सों दीठि मिली दुहु घाँकी ॥
देखत मोल’ भयो अंखियान कों को करें लाज कुटुंब पिता की ।
कैसे छुटाई छुटै अँटको रसखानि दुहूँ की बिलोकनि बाँकी ॥७४॥
मोहन को मुरली सुनिकै वह बौरी ह्वै आनि अटा चढ़ि झाँकी ।
गोप बड़ेन की डोठि बचाइ कै दीठि* सों दीठि मिली दुहु घाँकी ॥
देखत मोल’ भयो अंखियान कों को करें लाज कुटुंब पिता की ।
कैसे छुटाई छुटै अँटको रसखानि दुहूँ की बिलोकनि बाँकी ॥७४॥