मोहन सों अटक्यौ मनु

Raskhan

मोहन सों अटक्यौ मनु री कल जाते परै सोइ क्यों न बतावें ।
व्याकुलता निरखे विन मूरति भागति भूख न भूषन भावे ॥
देखे तैं नेकु सम्हार रहै न तवै झुकि के लखि लोग लजावें ।
चैन नहीं रसखानि दुहूँ विधि भूली सबै न कछू वनि आवे ॥२०९॥