यह देख धतूरे के

Raskhan

यह देख धतूरे के पात चबात औ गात सों धूरि लगावत हैं ।
चहुँ ओर जटा अँटकैं लटकैं फनि सैंक फनी फहरावत हैं ॥
रसखानि जेई चितवै चित दै तिनके दुख दुन्द भजावत हैं ।
गजखाल कपाल की माल बिसाल सो गाल बजावत आवत हैं ॥१२७॥