या' लकुटी अरु कामरिया
या’ लकुटी अरु कामरिया पर राज तिहूँ पुर को तजि डारौं ।
आठहुँ सिद्धि नवो निधि को सुख नन्द की गाइ चराइ बिसारौं ॥
रसखानि’ कबौं इन आँखिन सों ब्रज के बन बाग तड़ाग निहारौं ।
कोटिक’ रौ कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारौं ॥२॥
या’ लकुटी अरु कामरिया पर राज तिहूँ पुर को तजि डारौं ।
आठहुँ सिद्धि नवो निधि को सुख नन्द की गाइ चराइ बिसारौं ॥
रसखानि’ कबौं इन आँखिन सों ब्रज के बन बाग तड़ाग निहारौं ।
कोटिक’ रौ कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारौं ॥२॥