रसखानि यहै सुनि कै
रसखानि यहै सुनि कै गुनि कै हियरा सत टूक ह्वै फाटि गयो है ।
सुतो जानत हैं न कछू हम ह्यौं उन वा पढ़ि मन्त्र कहा धौं दयो है ॥
सुनो साँची कहैं जिय मैं निज जानि कै जानत हौ जस कैसो लयो है ।
सब लोग लुगाई कहैं ब्रज माँहि अरे हरि चेरी को चेरो भयो है ॥९५॥