लंगर छैलहि गोकुल मैं

Raskhan

लंगर छैलहि गोकुल मैं मग रोकत संग सखा ढिग तै हैं ।
जाहि न ताहि दिखावत आँखि सु कौन गई अव तोसों करै हैं ।
हाँसी में हार हद्यौ रसखानि जु जौ कहूँ नेकु तगा टुटि जै हैं ।
एकहि मोती के मोल लला सिगरे व्रज हाटहि हाट बिकैहैं ॥१८३॥