लाज के लेप चढ़ाइ
लाज के लेप चढ़ाइ कै अंग पची सब सीख को मन्त्र सुनाइकै ।
गाड़रू ह्वै ब्रज लोग थक्यौ करि औषद बेसक सौंह दिवाइ कै ॥
ऊधो सो को रसखानि कहै जिन चित्त धरौ तुम एते उपाइ कै ।
कारे बिसारे* कों चाहै उतार्यौ अरे विष बावरे राख लगाइ कै ॥९४॥
लाज के लेप चढ़ाइ कै अंग पची सब सीख को मन्त्र सुनाइकै ।
गाड़रू ह्वै ब्रज लोग थक्यौ करि औषद बेसक सौंह दिवाइ कै ॥
ऊधो सो को रसखानि कहै जिन चित्त धरौ तुम एते उपाइ कै ।
कारे बिसारे* कों चाहै उतार्यौ अरे विष बावरे राख लगाइ कै ॥९४॥