लाड़िली* लाल लसैं लखिये

Raskhan

लाड़िली* लाल लसैं लखिये अलि पुंजन कुंजन’ में छवि गाढ़ी ।
ऊजरी ज्यों बिजुरी सी जुरी चहूँ गजरी केलि कला सम काढ़ी ॥
त्यों रसखान न जानि परै सुखमा* तिहुँ लोकनि की अति वाढी ।
लालन बाल लिये बिहरैं छहरें सिर मोरपखी ठग ठाढ़ी ॥१४१॥