लाल की आज छठी
लाल की आज छठी व्रज लोग अनंदित नंद बढ़्यौ अन्हावत ।
चाइन चारु वधाइन लै चहुँ ओर कुटुंब अघात न गावत’ ।
नाचत बाल बड़े रसखानि छके हित काहु कै लाज न आवत ।
तैसोई मात पिताउ लह्यौ उलह्यौ कुलही कुलही पहिरावत ॥२५९॥
लाल की आज छठी व्रज लोग अनंदित नंद बढ़्यौ अन्हावत ।
चाइन चारु वधाइन लै चहुँ ओर कुटुंब अघात न गावत’ ।
नाचत बाल बड़े रसखानि छके हित काहु कै लाज न आवत ।
तैसोई मात पिताउ लह्यौ उलह्यौ कुलही कुलही पहिरावत ॥२५९॥