लोग कहैं ब्रज के

Raskhan

लोग कहैं ब्रज के रसखानि अनंदित नन्द जसोमति जू पर ।
छोहरा आजु नयो जनम्यो तुमसो कोऊ भागभर्यो नहिं भू पर ॥
वारि कै दाम सवाँर करौ अपने अपचाल कुचाल ललू पर ।
नाचत रावरो लाल गुपाल सो काल सो ब्याल कपाल के ऊपर ॥११२॥