वन वाग तड़ागनि कुंजगली

Raskhan

वन वाग तड़ागनि कुंजगली अँखियाँ सुख पाइहैं देखि दई ।
अब गोकुल माँझ विलोकियैगी वह गोप सभाग सुभाय रई ॥
मिलिहै हँसि गाइ कवे रसखानि कबै व्रजवालनि प्रेममई ।
वह नील निचोल* के घूँघट की छवि देखवी देखन लाज लई ॥१८९॥