वह घंरनि धेनु अबेर

Raskhan

वह घंरनि धेनु अबेर सबेर न फेरन लाल लकुट्टन की’ ।
वह तीछन चच्छु कटाछन की छवि मोरन भौंह भृकुट्टन’ की ।
वह लाल की चाल चुभी चित मैं रसखान संगीत-उघट्टन’ की ।
वह पीत पटककन* की चटकानि लटककन मोर मुकुट्टनि’ की ॥ २४४॥