वह देखि धतूरे के

Raskhan

वह देखि धतूरे के पात चवात औ गाति सों धूरि लगावतु है ।
चहुँ ओर जटा लटकैं अति के फनि सैक फनी फहरावतु है ।
रसखानि जेई चितवैं चितु दै तिनके दुख दंद बजावतु है ।
गज खाल कपाल की माल विसाल सो गाल बजावतु आवतु है ॥२५७॥