वह सोई हुती परजंक

Raskhan

वह सोई हुती परजंक लली लला लीनो सु आय भुजा भरिकै ।
अकुलाय के चौंक उठी सु डरी निकरी चहै अंकनि तें फरिकै ॥
झटका झटकी में फटो पटुको दरकी अँगिया मुकता झरिकै ।
मुख बोल कढ़ें रिस से रसखानि हटो जू लला निबिया धरिकै ॥९३॥