वारहीं* गोरस बेंचि री

Raskhan

वारहीं* गोरस बेंचि री आजु तूं माइ कै मूड़ चढ़ै कत मोड़ी* ।
आवत जात लौं होयगी साँझ भटू जमुना भतरौंड़* लौं ओड़ी ॥
ऐसे में भेंटतही रसखानि ह्वैहैं अँखियाँ बिन काज’ कनौड़ी* ।
एरी बलाइ ल्यौं जाइगी बाज अबै ब्रजराज सनेह की डौड़ी ॥२०॥