वा मुख की मुसकानि

Raskhan

वा मुख की मुसकानि भटू अँखियानि तैं नेकु टरै नहिं टारी ।
जौ पलकैं पल लागति हैं पल ही पल माँझ पुकारै पुकारी ।
दूसरी ओर तैं नेकु चितै इन नैनन नेम गह्यौ बजमारी ।
प्रेम की वानि कि जोग कलानि गही रसखानि विचार विचारी ॥१७८॥