वेई ब्रम्हा ब्रम्हा जाहि

Raskhan

वेई ब्रम्हा ब्रम्हा जाहि सेवत हैं रैन-दिन
सदासिव सदा ही धरत ध्यान गाढ़े हैं ।
वेई विष्णु जाके काज सानी मूढ़ राजा रंक
जोगी जती ह्वैं कै सीत सह्यौ अंग डाढ़े हैं ।
वेई ब्रजचंद रसखानि प्रान प्रानन के
जाके अभिलाख लाखलाख भाँति बाढ़े हैं ।
जसुधा के आगे वसुधा के मान-मोचन में
तामरस-लोचन खरोचन को ठाढ़े हैं ॥१५६॥