श्री वृषभान की छान*
श्री वृषभान की छान* धुजा अटकी लरकान तैं आन लई री ।
वा रसखान के पानि की जानि छुड़ावति राधिका प्रेममई री ॥
जीवन मूरि* सी नेज लिये इनहूँ चितयौ उनहूँ चितई री ।
लाल लली दृग जोरत ही सुरझानि गुड़ी उरझाय दई री ॥१६८॥
श्री वृषभान की छान* धुजा अटकी लरकान तैं आन लई री ।
वा रसखान के पानि की जानि छुड़ावति राधिका प्रेममई री ॥
जीवन मूरि* सी नेज लिये इनहूँ चितयौ उनहूँ चितई री ।
लाल लली दृग जोरत ही सुरझानि गुड़ी उरझाय दई री ॥१६८॥