संभु धरै ध्यान जाको

Raskhan

संभु धरै ध्यान जाको जपत जहान सब
तातैं न महान और दूसर अवरेख्यौ मैं ।
कहै रसखान वही बालेक सरूप धरै
जाको कछु रूप रंग अद्भुत अवलेख्यौ मैं ।
कहा कहूँ आली कछू कहती बनै न दसा
नन्द जी के अंगना में कौतुक एक देख्यौ मैं ।
जगत को ठाटी महापुरुष बिराटी जो
निरंजन निराटी ताहि माटी खात देख्यौ मैं ॥१५५॥