सार की सारी सो
सार की सारी सो भारी लगै धरिबै कहँ सीस बघंबर पैयाँ ।
हाँसी सो दासी सिखाइ लई हैं वेई जु वेई रसखानि मन्हैया ॥
जोग गयो कुबजा की कलानि मै री कब ऐहैं जसोमति मैया ।
हा हा न ऊधौ कुढ़ावो हमें अबहीं कहि दै ब्रज बाजै बधैया ॥११३॥
सार की सारी सो भारी लगै धरिबै कहँ सीस बघंबर पैयाँ ।
हाँसी सो दासी सिखाइ लई हैं वेई जु वेई रसखानि मन्हैया ॥
जोग गयो कुबजा की कलानि मै री कब ऐहैं जसोमति मैया ।
हा हा न ऊधौ कुढ़ावो हमें अबहीं कहि दै ब्रज बाजै बधैया ॥११३॥