सुधि होत बिदा नर

Raskhan

सुधि होत बिदा नर नारिनु की द्युति दीठि परे बहियाँ पर की ।
रसखान विलोकत गुंज छरानि तजैं कुल कानि दुहूँ घर की ।
सहरात हियौ फहरात हवाँ चितवैं फहरानि पितम्बर की ।
यह कौन खरौ इतरात गहै वलि की बहियाँ छहियाँ वर की ॥१७०॥