सुनिये सब को कहिये
सुनिये सब को कहिये न कछू रहिये इमि या भव डागर में ।
करि ये व्रत नेम सच्चाई लिये जिनतैं तरिये भव सागर में ॥
मिलिये सब सों दुरभाव बिना, रहिये सतसंग उजागर में ।
रसखान गोविन्दहि यों भजिये जिमि नागरि को चित गागर में ॥१५०॥
सुनिये सब को कहिये न कछू रहिये इमि या भव डागर में ।
करि ये व्रत नेम सच्चाई लिये जिनतैं तरिये भव सागर में ॥
मिलिये सब सों दुरभाव बिना, रहिये सतसंग उजागर में ।
रसखान गोविन्दहि यों भजिये जिमि नागरि को चित गागर में ॥१५०॥