सुन्दर स्याम सिरोमनि मोहन

Raskhan

सुन्दर स्याम सिरोमनि मोहन जोहन मैं चित चोरत है ।
बाँके बिलोकनि की अवलोकनि नोकनि कै दृग जोरत है ॥
रसखानि महावर रूप सलोने को मारग तैं मन मोरत है ।
ग्रहकाज समाज सबै कुल लाज लला ब्रजराज को तोरत है ॥३९॥