सेस गनेस महेस दिनेस

Raskhan

सेस गनेस महेस दिनेस सुरेसहु जाहि निरन्तर गावैं ।
जाहि अनादि अनन्त अखण्ड अछेद अभेद सुबेद बतावैं ॥
नारद से सुक ब्यासु रहैं पचि हारे तऊ पुनि पार न पावैं ।
ताहि अहीर की छोहरिया छछिया भरि छाछ पै नाच नचावैं ॥३१॥