सोहत है चंदवा सिर
सोहत है चंदवा सिर मौर के जैसियै सुन्दर पाग कसी है ।
तैसियै गोरज भाल बिराजति जैसी हिये वनमाल लसी है ॥
रसखानि बिलोकत बौरी* भई दृग मूंदि कै ग्वालि पुकारि हँसी है ।
खोलि री घूँघट खोलौं कहा वह मूरति नैनन माँझ बसी हैं ॥२१॥
सोहत है चंदवा सिर मौर के जैसियै सुन्दर पाग कसी है ।
तैसियै गोरज भाल बिराजति जैसी हिये वनमाल लसी है ॥
रसखानि बिलोकत बौरी* भई दृग मूंदि कै ग्वालि पुकारि हँसी है ।
खोलि री घूँघट खोलौं कहा वह मूरति नैनन माँझ बसी हैं ॥२१॥