काय बचो मन ते बसी

Rasleen

काय बचो मन ते बसी हौं जिय संग निकारइ जो कछु तेरे ।

हाथ के माथे धरे कुच संभु के काय के सौंह को देत सबेरे।

नाभि के कुंड में सोरी के सौंह को मो मन हौं रसलीन जो तेरे ।

बात की जा परतीति नही मुख को ए धरो अब जीभ में मेरे ॥