सरजू बर तीरहि तीर फिरैं
सरजू बर तीरहि तीर फिरैं रघुबीर, सखा अरु बीर सबै।
धनुहीं करतीर, निषंग कसे कटि, पीत दुकूल नवीन फबै॥
तुलसी तेहि औसर लावनिता दस चारि नौ तीन इकील सबै।
मति भारति पंगु भई जो निहारि, विचारि फिरी उपमा न पवै॥
सरजू बर तीरहि तीर फिरैं रघुबीर, सखा अरु बीर सबै।
धनुहीं करतीर, निषंग कसे कटि, पीत दुकूल नवीन फबै॥
तुलसी तेहि औसर लावनिता दस चारि नौ तीन इकील सबै।
मति भारति पंगु भई जो निहारि, विचारि फिरी उपमा न पवै॥