Gwalior
बिहारी लाल चौबे का जन्म ग्वालियर में हुआ था और उनका अधिकांश जीवन आमेर (जयपुर) के महाराजा जयसिंह प्रथम के दरबार में बीता। वे रीति-सिद्ध काव्यधारा के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। उनकी एकमात्र किंतु अमर रचना बिहारी सतसई है, जिसमें लगभग 700 दोहे संग्रहित हैं। बिहारी के दोहे गागर में सागर भरने की कला के लिए प्रसिद्ध हैं, जिनमें श्रृंगार, भक्ति और नीति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उनके बारे में कहावत प्रसिद्ध है: “सतसैया के दोहरे, ज्यु नाविक के तीर; देखन में छोटे लगैं, घाव करैं गंभीर।”