जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' Jagannath Das Ratnakar

1866-1932

Varanasi

Varanasi

जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’ आधुनिक काल के एक महान विद्वान और ब्रजभाषा के निष्ठावान कवि थे। वाराणसी में जन्मे रत्नाकर जी अयोध्या राजघराने के खजांची के रूप में कार्यरत रहे। जब आधुनिक हिंदी में खड़ी बोली का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा था, तब भी उन्होंने ब्रजभाषा की शास्त्रीय परंपरा को जीवित रखा। उनकी कालजयी रचना उद्धव शतक (1929) में उद्धव और गोपियों के संवाद के माध्यम से ज्ञान और भक्ति का अनूठा दार्शनिक व भावुक निरूपण मिलता है। वे ब्रजभाषा काव्य के अंतिम महान आचार्य-कवि माने जाते हैं।