केशवदास Keshavdas

1555–1617

Orchha

Orchha

ओरछा के एक विद्वान सनाढ्य ब्राह्मण परिवार में जन्मे केशवदास बुंदेला शासक इंद्रजीत सिंह और वीर सिंह देव के दरबारी कवि थे। उन्होंने भक्ति काल और रीतिकाल के संधि-स्थल पर साहित्य सृजन किया। रीति-शास्त्र, अलंकार और क्लिष्ट छंद-विधान के असाधारण प्रयोग के कारण उन्हें “कठिन काव्य का प्रेत” भी कहा जाता है। उनकी प्रमुख कृतियों में रसिकप्रिया, कविप्रिया और रामचंद्रिका शामिल हैं। केशवदास ने संस्कृत काव्यशास्त्र की परंपरा को ब्रजभाषा में ढालकर रीतिकाल की सशक्त नींव रखी।