मलूकदास Malukdas

1574-1682

Kada

Kada

मलूकदास निर्गुण भक्ति धारा के संत-कवि थे, जिनका जन्म कड़ा (प्रयागराज के पास) में हुआ था। उन्होंने बाहरी आडंबरों, जाति-पांति और कर्मकांडों का विरोध करते हुए ईश्वर-भक्ति, दया और मानवीय समानता का संदेश दिया। उनकी भाषा ब्रजभाषा और अवधी का सहज मिश्रण है, जिसमें अरबी-फारसी के शब्द भी मिलते हैं। संतोष और ईश्वर-कृपा पर आधारित उनका यह दोहा जन-जन की जुबान पर प्रसिद्ध है: “पंछी करे न चाकरी, पंछी करे न काम; दास मलूका कह गये, सब के दाता राम।”