Kannauj
परमानंददास पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक महाप्रभु वल्लभाचार्य के शिष्य और अष्टछाप के प्रमुख कवियों में से एक थे। कन्नौज में जन्मे परमानंददास का जीवन वल्लभाचार्य से मिलने के बाद पूरी तरह भक्तिमय हो गया और वे श्रीनाथजी की सेवा में लीन हो गए। उनके रचे हजारों पद परमानंद सागर में संग्रहित हैं। उन्होंने विशेष रूप से कृष्ण की बाल-लीलाओं और वात्स्यल्य रस का अत्यंत हृदयस्पर्शी एवं संगीतमय वर्णन किया है।